विचार ही विचार की औषधि हे ,मन की औषधि पवित्र विचार हे । इसलिए वही देखो ,वही पढो और वही सुनो जो कल्याण कारक हो !
ग़ुरुवर सुधंशुजी महाराज के प्रवचनांश
मंगलवार, १९ जनवरी २०१०
रविवार, १० जनवरी २०१०
AMRIT VANI] तर्क और प्यार
----- Original Message -----
Sent: Sunday, January 10, 2010 9:01 AM
Subject: [Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI] तर्क और प्यार
From: Madan Gopal Garga
To: mggarga@gmail.comSent: Sunday, January 10, 2010 9:01 AM
Subject: [Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI] तर्क और प्यार
तर्क कर लेना भली बात हें पर उसको तकरार में मत् बदल लेना !
जितना त्याग होगा उतना प्यार गहरा होगा ,त्यागी बनो प्यार अपने आप होजाएगा
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
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गुरुवार, ७ जनवरी २०१०
नव वर्ष की शुभ काम्नाएं
----- Original Message -----
Sent: Wednesday, January 06, 2010 10:50 AM
Subject: नव वर्ष की शुभ काम्नाएं
From: mggarga
To: ananddhamdelhi@gmail.comSent: Wednesday, January 06, 2010 10:50 AM
Subject: नव वर्ष की शुभ काम्नाएं
सु:ख समृद्धि से भरपूर
हर घर आंगन हो !
जीवन में नित नूतन खुशियां आएँ ,
हर दिन ,हर पल मन भावन हो !
फैले यश कीर्ति दिग्दगान्त,
तन मन धन अति पावन हो !
बढे प्रेम श्रद्धा सिमरन नित ,
हरि कृपा का बरसता सावन हो !
नव वर्ष की आप सबको ,
हार्दिक मंगल कामनाएं !
-आचार्य सुधांशु
जीवन संचेतना जनवरी 2010
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